जन्माष्टमी हिन्दुओं का एक शुभ दिन है। इस दिन भगवान कृष्ण
को खुश करने के लिये कई कार्यक्रम किये जाते हैं। इस दिन श्रद्धालु भजन कर के अपने
कृष्ण भगवान की पुजा करते हैं। मंदिरों को भी फुलों और रोश्नी से सजाया जाता हैं।
इस दिन बच्चे कृष्ण, सुदामा, राधा, कंस बन कर भगवान की झांकियां भी निकालते हैं।
पुजा अर्चना सुबह सवेरे ही शुरु हो जाती है। सबसे पहले तो भगवान कृष्ण की परतिमा को
दही, शहद, घी, गंगाजल इत्यादी से नहलाया जाता है और भगवान कृष्ण की परतिमा को नए कपड़े
पहनाए जाते हैं। फिर भगवान को पेठा, दूध, खीर इत्यादी का भोग लगाया जाता है। अंत में
भगवान कृष्ण की पूजा की जाती है और आरतियां गाई जाती हैं।
इसके बाद भक्त अपना व्रत खोलते हैं और अन्न ग्रहण करते हैं।
कृष्ण जी की पुजा के समय कई आरतियां की जाती हैं। उनमें से एक नीचे दी गई है।
कृष्ण जी की आरती
आरती युगल किशोर की कीजै, तन मन धन न्यौछावर कीजै॥
रवि शशि कोटि बदन की शोभा, ताहि निरख मेरो मन लोभा॥
गौर श्याम मुख निरखत रीझै, प्रभु को रूप नयन भर पीजै॥
कंचन थार कपूर की बाती, हरि आए निर्मल भई छाती॥
फूलन की सेज फूलन की माला, रत्न सिंहासन बैठे नन्दलाला॥
मोर मुकुट कर मुरली सोहे, नटवर वेष देख मन मोहे॥
ओढ़े पीत नील पट सारी, कुंज बिहारी गिरिवर धारी॥
श्री पुरुषोत्तम गिरिवर धारी, आरती करत सकल ब्रज नारी।
नंदनंदन वृषभानु किशोरी, परमानन्द स्वामी अविचल जोरी॥
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